गुरु / अध्यापक

यह पुरस्कार वेदों के उस अध्यापक को दिया जाएगा जिसने वेदों के अध्यापन में समर्पण और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है।

इस पुरस्कार के अन्तर्गत एक प्रमाण-पत्र, पदक और ₹ 5,00,000 की नकद राशि प्रदान की जाएगी।

इस पुरस्कार के योग्य होने के लिये आपको निम्नलिखित सभी पात्रताएं पूरी करना आवश्यक हैः

  • वर्तमान में आप किसी योग्य वेद विद्यालय में अध्यापक हैं या कुमाराध्यापक/एकमात्र अध्यापक हैं और स्वयं का गुरुकुल चला रहे हैं।
  • पूर्ण रूप से वेदों के अध्यापन और प्रसार के लिये समर्पित हैं।
  • आपने न्यूनतम “स्तर-2” की योग्यताएं प्राप्त कर ली हों (कृपया “आवेदन कैसे करें” की तालिका देखें)।
  • कम से कम 10 साल से पूर्णकालिक वेदों के अध्यापन में हैं।
  • यदि किसी योग्य विद्यालय में पढ़ा रहे हैं तो आपके कम से कम 5 छात्र होने चाहिए; यदि एक अध्यापक के गुरुकुल में या कुमाराध्यापक हैं तो कम से कम 3 छात्र होने चाहिए।
  • आपने पूर्व में भारतात्मा आदर्श वेदाध्यापक पुरस्कार नहीं जीता है।

आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 10 जुलाई 2018 है। आवेदन 10 जुलाई से पहले सिंघल फाउन्डेशन के कार्यालय में पहुंच जाने चाहिए। इस तिथि के पश्चात प्राप्त आवेदनों पर 2018 के पुरस्कारों के लिये विचार नहीं किया जाएगा।

प्रत्येक श्रेणी के लिये आवेदन फॉर्म आप हमारी वेबसाइट www.bharatatmapuraskar.org से डाउनलोड कर सकते हैं। आवेदन फॉर्म आप +91 98292 42746 पर अपने पूरे पते के साथ SMS भेज कर भी डाक द्वारा प्राप्त कर सकते हैं।

यह सुनिश्चित करें कि योग्यता मापदंडों को पूरा करने के लिए आपने अपने दस्तावेज/प्रमाणपत्र/ अंकतालिकाएं साक्ष्य के तौर पर संलग्न कर दिए हैं।

आप आवेदन हस्तलिखित या माइक्रोसॉफ्ट वर्ड का प्रयोग कर भर सकते हैं. यदि आप आवेदन ईमेल के द्वारा भेज रहे हैं तो सिर्फ .pdf में ही भेजें ना कि .doc या .docx

पूर्णतः भरा हुआ आवेदन फॉर्म डाक या कूरियर सेः सिंघल फाउंडेशन, द्वारा सिक्योर मीटर्स लिमिटेड, प्रतापनगर इंडस्ट्रियल एरिया, उदयपुर 313003 को भेजें।

या

आप सभी दस्तावेजों को स्कैन करके पी.डी.एफ़ (pdf) फॉरमेट में ईमेल करेंः applications@bharatatmapuraskar.org

चयन प्रक्रिया

सिंघल फाउन्डेशन प्रत्येक श्रेणी के विजेता चुनने के लिए एक उच्च गुणवत्ता वाली और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाती है। विजेताओं का निर्णय दो चरणों की प्रक्रिया द्वारा किया जायेगा। पहले चरण में वैदिक विशेषज्ञों की एक कमिटी, प्राप्त आवेदनों (शिक्षकों और विद्यार्थियों के नाम अज्ञात होंगे) की समीक्षा कर संभावित विजेताओं की छंटनी करके एक सूची बनाएगी। यह छंटनी आवेदकों द्वारा आवेदन पत्र में दी गई जानकारी के आधार पर की जाएगी।अतः आवेदन पत्र का पूरा और सही भरा जाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके पश्चात् इस सूची पर निर्णायक समिति (जूरी) जिसमें सभी वेदों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ होंगे, द्वारा विचार किया जायेगा। विजेताओं पर अपना अंतिम निर्णय लेने से पूर्व जूरी चयनित विद्यालयों का दौरा करेगी और चयनित शिक्षकों और विद्यार्थियों से मुलाकात करेगी।

पात्र अध्यापकों का मूल्यांकन स्वयं और विद्यार्थी की शिक्षा में श्रेष्ठता के लिए निम्न मापदंडों के आधार पर होगाः

  • स्तर-2 के अतिरिक्त शैक्षिक योग्यताएं और श्रेष्ठता जैसे स्वशाखा में षडंगा, भाष्य, लक्षण की योग्यताएं और अन्य शाखाओं का अध्ययन या असाधारण वैदिक ज्ञान।
  • आपके पूर्व और वर्तमान शिष्यों द्वारा शिक्षा में अर्जित श्रेष्ठता।
  • उन छात्रों की श्रेष्ठता जिन्होंने बुनियादी योग्यताओं के बाद भी वैदिक शिक्षा जारी राखी।
  • पूर्णकालिक अध्यापन के लिए प्रेरित किये गए छात्रों की संख्या।
  • वैदिक परम्पराओं के अनुसार जीवन आचरण।

जब आप पुरस्कार के लिये आवेदन करें तो यह सुनिश्चित करें कि आपने योग्यता मानदण्डों को पूरा करने के लिए आवश्यक सभी दस्तावेज साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत कर दिए हैं।