
श्री दत्तात्रेय वेदविद्या गुरुकुलम्, राजमहेन्द्रवरम्, आन्ध्रप्रदेश
पता: वेद–गोदावरी मार्ग, सीताराम-अग्रहारम्, कोन्थमुरु, राजमहेन्द्रवरम्, आन्ध्रप्रदेश
वेद एवं वेदशाखा: कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय शाखा)
संस्थापक: गुल्लपल्ली श्री सीतारामचन्द्र आञ्जनेय घनपाठी
स्थापना वर्ष: 2000
श्री दत्तात्रेय वेदविद्या गुरुकुलम् आन्ध्रप्रदेश के राजमहेन्द्रवरम् में पुण्य-पवित्र गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। इस वेदविद्यालय की स्थापना वेदसेवा में समर्पित श्री गुल्लपल्ली सीतारामचन्द्र आञ्जनेय घनपाठीजी ने प्रतिष्ठित वैदिक विद्वानों के पावन सान्निध्य में की थी। श्री गुल्लपल्लीजी ने अपने आदर्श वेदाध्यापन से “भारतात्मा अशोकजी सिंघल आदर्श वेदाध्यापक वेदपुरस्कार – 2020” को भी सुशोभित किया है।
इस वेदविद्यालय में विगत पच्चीस वर्षों से कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय शाखा का साङ्गोपाङ्ग अध्ययन-अध्यापन कराया जा रहा है। यहाँ पर कृष्णयजुर्वेद के ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषदों के साथ ही संहिता के पद, क्रम, जटा, घन आदि विकृति पाठों, प्रस्थानत्रयी ग्रन्थों, श्रौतस्मार्तग्रन्थों तथा भाष्यग्रन्थों के अध्ययन परम्परा से विद्यार्थियों को दीक्षित किया जा रहा है।
श्रीगुल्लपल्लीजी इस वेदविद्यालय के माध्यम से वेदविहित परम्परानुसार जीवन आचरण तथा दैनिक अनुष्ठानादि कार्यों के साथ वेदाध्ययन परम्परा के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए दृढसंकल्पित हैं। श्री दत्तात्रेय वेदविद्या गुरुकुलम् ने अनेक घनान्त विद्वानों को तैयार किया है, जो आज अनेक वेदविद्यालयों में वेदाध्यापन-सेवा में समर्पित हैं। इस वेदविद्यालय में अध्यापन कर रहे अध्यापक भी इसी वेदविद्यालय के योग्य विद्यार्थी रहे हैं।
श्री दत्तात्रेय वेदविद्या गुरुगुलम् को वेदाध्ययन व अध्यापन में उत्तम योगदान के लिए वर्ष – 2025 का “भारतात्मा अशोकजी सिंघल वेदविद्यालय पुरस्कार’ प्रदान किया गया है।


