वेदमूर्ति श्री अनन्तकृष्ण भट्ट ए॰
निवास-स्थान: बेंगलुरू, कर्नाटक
पिता का नाम: स्व॰ श्री नारायण भट्ट
माता का नाम: श्री ललिता भट्ट
वेद एवं वेदशाखा: कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय शाखा)
गुरुजन: स्व॰ श्री नारायण भट्टजी, अध्ययन श्री विश्वेश्वर भट्टजी, श्री सुन्दरेशजी, श्रीनिवास रंगाचार्यजी, श्री वेंकट नाथजी और श्री नारायण अडिगजी
पुरस्कार: भारतीतीर्थ पुरस्कार (शारदापीठ, शृङ्गेरी), आस्थानविद्वान् (अवधूत दत्तपूठ, मैसूर), श्रौतस्मार्तविद्यानिधि (श्रीरङ्गम् आण्डवन् आश्रम), वेदविचक्षण (दत्तात्रेय वेदविद्यालय, राजमहेन्द्रवरम्) आदि

श्री अनन्तकृष्णजी भट्ट कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा के सलक्षण घनान्त विद्वान हैं। आपका जन्म कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले की विटला सीमा में अमाई परिवार के पुरोहित कुल में हुआ हैं।

अनन्तकृष्णजी के पिताजी कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा व बौधायन स्मार्त प्रयोग के उद्भट्ट विद्वान् थे। भट्टजी ने प्रारम्भिक वेदाध्ययन अपने पिताजी से व प्राथमिक विद्यालयी शिक्षा गाँव के ही विद्यालय से पूरी की। आपने वेदों के गहन अध्ययन की तीव्र ईच्छा से कर्नाटक के सागर प्रान्त के वरदपुरा की पवित्र भूमि पर स्थित श्रीधर संघ वेदविद्यालय में प्रवेश लिया। आपने वहाँ छः वर्षों तक कृष्ण यजुर्वेद, बौधायन प्रयोग, काव्यादि विषयों का अध्ययन श्री विश्वेश्वर भट्टजी के सान्निध्य में किया। इसके साथ ही आपने मैसूर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि भी प्राप्त की। आपने वेदमूर्ति श्री सुन्दरेश गुरुजी और श्रीनिवास रंगाचार्य गुरुजी से क्रमान्त व घनान्त का अध्ययन तथा श्री वेंकटनाथन् गुरुजी से भाष्य का अध्ययन किया।

गुरुजी मीमांसाशास्त्र के भी विद्वान हैं। आपने काञ्चीमठ में न्यायप्रकाश, जैमिनीय न्यायमाला जैसे ग्रन्थों की परीक्षा भी उत्तीर्ण की तथा महाराजा संस्कृत महाविद्यालय, मैसूर के विद्वान् नारायण अडिग गुरुजी से पूर्व मीमांसाशास्त्र का भी अध्ययन किया। श्री भट्टजी अपने विद्यार्थी जीवन में अपने सहपाठियों को भी अध्यापन कराया करते थे। गुरुजी ने अपने वैदिक ज्ञान से अनेक विद्यार्थियों के जीवन को प्रकाशित किया हैं। गुरुजी ने अपने ज्ञान व अनुभव से ग्रन्थों के प्रकाशन व संशोधन में भी अपना योगदान प्रदान कर भगवती माँ सरस्वती की उपासना की हैं। गुरुजी ने “कृष्णयजुर्वेदमन्त्रस्वाहाकारविधि” ग्रन्थ की सम्पादन समिति में अपना अमूल्य योगदान दिया। इसके साथ ही “बौधायन-अग्निमुखप्रकाश” “तैत्तिरीयप्रातिशाख्यप्रकाश” आदि लोकोपयोगी ग्रन्थों का प्रकाशन भी किया हैं। वर्तमान में श्री अनन्तकृष्णभट्टजी कर्नाटक के बेंगलुरू में वेदाध्यापन परम्परा की सेवा में समर्पित हैं। वेदभगवान् आपको दीर्घायुष्य प्रदान करें।

वेदमूर्ति श्री अनन्तकृष्ण भट्टजी ने अपने आदर्श वेदाध्यारक के द्वारा वर्ष – 2025 के “भारतात्मा अशोकजी सिंघल आदर्श वेदाध्यापक पुरस्कार” को सुशोभित किया है।